Sunday, February 18, 2018

एक नज़र बैंकिंग के हाल पर भी ...!

जैसा कि आप जानते हैं सरकार अपने ज्यादातर काम ठेके पर देने लगी है और सब सरकारी नौकरियां ठेके पर दी जा रही हैं, ठेके पर काम करने वालों को ठेकेदार 10-15 हज़ार Rs देता है और उसी में वो जैसे तैसे गुजरा करते हैं। बैंकिंग सेक्टर ही एक ऐसा सेक्टर बचा है जहाँ सिस्टम access वाली नौकरियाँ ठेके पर नहीं दी जा सकती क्योंकि ठेके पर काम करने आया व्यक्ति कभी भी फ्रॉड करके भाग सकता है। इसलिए सरकार धीरे धीरे से बैंक कर्मचारियों के वेतन में महँगाई के मुताबिक वृद्धि नहीं कर रही है। 
अब मैं आपको भारत के बैंकिंग संरचना के बारे में बताता हूँ।
भारत की बैंकिंग के कुल हिस्से का लगभग 70% सरकारी बैंकों से होता है तथा लगभग 90% जनता (खाते के आधार पर) इनकी जद में आती है। सरकारी बैंकों में लगभग 10 लाख कर्मचारी हैं।
जैसा कि आप जानते हैं केंद्रीय कर्मचारियों के लिए हर 10 साल में सरकार एक pay commission लागू करती है, वो तय करता है कि कर्मचारियों को कितना वेतन दिया जाय?
लेकिन बैंकों में ऐसा कोई कमीशन नहीं होता, वहाँ हर 5 साल में वेतन वृद्धि आपसी सहमति (बैंकों की unions और सरकार की तरफ से Indian banks assciation(IBA)). इस आपसी सहमति को bipartite settlement (द्विपक्षीय समझौता) कहते हैं।
IBA से बातचीत करने के लिए बैंकों की यूनियंस ने एक कॉमन प्लेटफार्म बनाया है जिसका नाम है united forum of bank unions (UFBU), जो कि negotiation का काम करती है।
पिछले आप जितने भी समझौते देखोगे उसमे काम से कम 3 साल का delay रहा है, यानी 5 साल में जो बढ़ी हुई सैलरी मिलनी थी वो सिर्फ 2 साल ही मिल पाती हैं और जो arrears मिलता है उसमें से 4% यूनियंस को देना पड़ता है। 
पिछली बार का समझौता 2012 में होना था लेकिन हुआ 2015 में। इस बार का समझौता Nov 2017 में होना था लेकिन अभी तक नहीं हुआ।
एक समय था जब बैंक अधिकारी की सैलरी IAS अधिकारी से ज्यादा थी, लेकिन जैसे जैसे settlements होते गए सैलरी काम होती गयी।
आज बैंक अधिकारी की सैलरी केंद्र के क्लर्क के बराबर है और बैंक क्लर्क की सैलरी राज्य सरकार के भृत्य के बराबर है। आप सोचिये एक बैंक का क्लर्क अपने आप को एक भृत्य से भी कम सैलरी पाकर कैसा सोचता होगा??
कुछ कारण जिनके कारण सैलरी नहीं बढ़ रही-
1. यूनियन के नेताओ का सदस्यों की बजाय मैनेजमेंट से ज्यादा मेल मिलाप होना।
2. ऐसा सुनने में आता है कि यूनियन के नेताओं और उनके रिश्तेदारों को बैंकों की तरफ से ठेके मिलते हैं outsourced projects के (कोई ठोस सबूत नहीं है इसका)
3. IBA, हर बार बैंको को हो रहे घाटे का या बढ़ रहे NPA का तर्क देकर समझौता कम सैलरी पर सेट करता है। वास्तव में अगर आप देखे तो कुल NPA में से 70% कॉरपोरेट्स के हैं जिनके लिए सामान्य सी ब्रांच में बैठे अधिकारी/कर्मचारी जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि मैनेजमेंट के बड़े लोग और वो कमिटियां हैं जिन्होंने बड़े लोन दिए। अगर आप औसतन अंदाजा लगाए तो इस भारी भरकम NPA के लिए बमुश्किल 1% लोग जिम्मेदार हैं जिसकी सज़ा बाकी 99% बैंकर्स क्यों भुगते?
और भी कई कारण हैं !
जब भी समय निकालें कृपया आप एक बार कोई भी सरकारी बैंक की ब्रांच में जाइये वहां आपको 5-6 लोग काम करते हुए मिलेंगे और कुछ ग्रामीण branches तो ऐसी हैं जहां 2-3 लोग ही होते हैं और काम देखिए बैंकर के नीचे:-

1. Lok Adalats
2. ATM management
3. Clearing
4. Pension disbursement
5. Death claims 
6. Complaints
7. Filing recovery suits
8. Filing EPs
9. RTI applications
10. Fresh NPA investigation
11. QMC investigation
12. CERSAI registration
13. SARFAESI action
14. Taking Possession
15. Fraud reports
16. Seizure of moveables
17. Auctioning of seized items
18. Auctioning of jewels 
19. Agriculture loans 
20. OTS settlements
21. SB account activations
22. Current accounts
23. LIC policies
24. OD facilities
25. PPF accounts
26. E-KYC
27. NRI customers 
28. Product marketing
29. Jewel loans
30. Mobile banking 
31. Net-banking 
32. Corporate Banking 
33. Housing loans
34. Vehicle loans
35. Educational loans
36. Compliance to RO/HO 
37. Advocates review
38. Valuers review
39. Seizure agents review
40. Jewel appraisers review
41. Bank Adalats
42. TDS/tax management
43. Cash management
44. Empaneling advocates
45. Empaneling valuers
46. Empaneling seizure agents
47. Empaneling jewel appraisers
48. Pnpa followup
49. Quarter end reports
50. Year end reports
51 cif De duplication
52 Self Audit
53 Jandhan yojna
54 Mudra Loan
55 General Insurance
56 aadhaar seeding
57 pmay
58 stand up India
59 pmjby
60 pmsby
61. Net banking failure.
62. ATM failed txn.
63. Maintaining rcrds of ECS return.
64. Soil notes n pre 2005 notes return
65. Repairing of passbook printng kiosk
67. Atm machine problems
68. Managing leave and deputation
69. Responsiblity rectify Failure link.
70. Attending call from zo fgm office ho and Customers
71. Reply on unnecessary queries like Where does my ECS amount go, why atm hotlisting charged debited..🙄
72 rtgs neft failure
73. Edu loan subsidy
74 stock audit
75 Locker SERVICE
76 unit visit
77 asset verification
78. stock statement
79. Filling up diposit and withdrawal slips of illiterate customers
80 banker account balancing
81. Phn service/ mail service to customers
82. Compliance report
83 cash remittances
84 pre sanctions visit
85 post sanctions visit
86 gold bond, apy
87. Upi mobile banking general card
88. cctv not working 
89. Electricity bill rent water bill
90. Replying Explanatory Letter 
91. Following up of complaint lodged by making calls in regular intervls
92. Maintaining cheque return register....
93. Concurrent audit ho inspection
94. Signature scanning
95. Loging complaint for not allowing to modify like DOB. N chk ready made reply "please contact concerned section..".
96. Giving clarification to fellow coligs that what we want to to say
97. LPG subsidiary related queries
98. Remembering passwords of all Systems software 
99. Answering questions like Why bank cant isue pan card?
100. Removing pins stuck in the keyboard 😀😀
101 Promoting Digital Banking 

Along with this, branch employee has to read and reply the emails from head office, Regional Office, customers and so on.....

Saturday, February 3, 2018

जब कभी अब्सार थक जायें...!



            जब कभी अब्सार थक जायें..

जब कभी अब्सार थक जायें इंतज़ार में ख़ुशी के,
मायूस विरान सी गलियां गुलज़ार भी होती हैं !

हमेशा यूँ हीं नहीं रहता अँधेरा आसमां पर,
याद रखना हर रात के बाद सुबह भी होती है !

सिर्फ अल्फाजों की जरुरत नहीं सदा सुनने के लिए,
अक्सर ख़ामोशियों में भी आवाजें रवां होती हैं !

गुजरता लम्हा देखता हूँ आईने को रुबरू रखकर,
तसव्वुर कैसे करें ख्वाहिशें  फिर भी जवां होती है !

आबो हवा कभी - कभी खिलाफ गर हो तो,
एक दिन सूरज की किरणें बेनक़ाब भी होती हैं !


     आपका :  प्रकाश !








Sunday, December 31, 2017

अलविदा 2017 ! Welcome 2018


*अलविदा 2017*



     मित्रों आने वाले साल को आप कैसे जीते हैं ये 100% आप पर निर्भर करता है ! मैं मानता हूँ कि आने वाले एक साल का एक -एक दिन life के एक -एक पन्ने की तरह है और 1st January 2018 को एक ऐसी बुक open होने वाली है जिसमें 365 pages हैं ! पर ख़ास बात यह है कि इस बुक के writer आप सभी हो और इस book के सभी पन्ने कोरे हैं !
    मित्रों life के हर दिन हर पन्ने को ख़ुशी , जोश, उत्साह, उमंग और सफलता से भर दो ! एक बात मैं आप सबसे साझा करना चाहूंगा कि goal और desire में फर्क होता है ! 85% लोगों के पास goal होता हीं नहीं , उनके पास सिर्फ desire होता है ! जैसे की मेरे पास बड़ा सा घर ! एक सुन्दर सी Car हो ये मात्र सोचना desire है न की goal. कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि सफल लोग goal oriented होते हैं ! आप भी अपना goal set करें और उसे प्राप्त करने के लिए मेहनत करें !


   वर्ष 2017 में आप सभी साथियो ने दिल से प्यार व योगदान दिया। जिसके लिए मैं दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। इस बीते हुए साल में संघर्ष के दौरान मेरे द्वारा भी मेरे कर्म व वाणी से यदि आपके दिल को कष्ट पहुँचा हो तो उसके लिए क्षमा चाहता हूँ।
उम्मीद करता हूँ कि आने वाला नव वर्ष 2018  आप सभी के लिए ढेर सारी खुशिया लेकर आये ।
धन्यवाद !
आपका
*प्रकाश  *
♥♥ कल आपको बधाई देने वालों की कतार लगी होगी /
हो सकता है उस भीड़ में हमारी शुभकामनाये आप न पढ़ पाये इसलिए आज हमारी तरफ़ से आपको व आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌷🌷

💐💐happy new year 2018 💐💐

             आपका: प्रकाश

Sunday, December 24, 2017

Merry Christmas




मित्रों Christmas... की आपको बहुत -बहुत बधाई एवं शुभकामनायें  !
प्रभु यीशु के जन्मदिन के मौके पर आज भारत समेत पूरी दुनिया में क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। 24 दिसम्बर रात से ही ‘हैप्पी क्रिसमस-मेरी क्रिसमस’ से बधाइयों का सिलसिला जारी हो जाता है। देश के सभी शहरों में लोगों के घर ‘क्रिसमस ट्री’ सजाया जाता है, तो सांता दूसरों को उपहार देकर जीवन में देने का सुख हासिल करने का संदेश देता है। मगर क्या आप जानते हैं क्रिसमस 25 को ही क्यों मनाया जाता है। 




25 December को  क्यों मनाया जाता है क्रिसमस
क्रिसमस का आरंभ करीबन चौथी सदी में हुआ था। इससे पहले प्रभु यीशु के अनुयायी उनके जन्म दिवस को त्योहार के रूप में नहीं मनाते थे। 


यीशु के पैदा होने और मरने के सैकड़ों साल बाद जाकर कहीं लोगों ने 25 दिसम्बर को उनका जन्मदिन मनाना शुरू किया। मगर इस तारीख को यीशु का जन्म नहीं हुआ था क्यूंकि सबूत दिखाते हैं कि वह अक्टूबर में पैदा हुए थे। दिसम्बर में नहीं। 
ईसाई होने का दावा करने वाले कुछ लोगों ने बाद में जाकर इस दिन को चुना था क्योंकि इस दिन रोम के गैर ईसाई लोग अजेय सूर्य का जन्मदिन मनाते थे और ईसाई चाहते थे की यीशु का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाए। 

आपका:  प्रकाश !

Wednesday, December 20, 2017

मुश्किल काम थोड़ा समय लेते हैं ...



मित्रों किसी ने सच हीं कहा है :



मुश्किल काम थोड़ा समय लेते हैं ...!
और असंभव काम थोड़ा और ज्यादा समय लेते हैं ...!



अतः जब किसी कार्य को जब आप सिद्ध करने में लगे हों और
वह काम आपको यदि कठिन लगे और उसे पूरा करने में आपको वक़्त ज्यादा लगे तो कृपया इन पंक्तिओं का समरण जरूर करें इसे आपको साहस जरूर मिलेगा ...!

 

Prakashp6692.blogspot.in
Hindisanchi.blogspot.in

Wednesday, December 6, 2017

Kimat 1 rupye ki (कीमत 1 रूपये की..)

 कीमत 1 रूपये की...

कई लोगों के जीवन में कई अलग - अलग अनुभव होते हैं. मेरे भी जीवन में कुछ ऐसे अनुभव हुए हैं जिनको भूल जाना हीं बेहतर है परन्तु ..कभी- कभी ये बातें अक्सर तन्हाई में याद आ हीं जाती है ! तो क्या अकेले सोच कर याद कर बर्दास्त कर लूं या फिर आप सभी से साझा कर लूं !
क्यूंकि मैं एक प्रसिद्ध हस्ती नहीं एक आम इंसान हूँ ..यदि मैंने आप सभी को अपना दोस्त समझ कर अपनी कुछ बातें साझा कर भी लीं तो क्या मेरी छवि धूमिल हो जाएगी ...मैं समझता हूँ ...नहीं ! तो मित्रों आइये एक छोटी सी घटना मैं आपसे साझा कर हीं लेता हूँ !
बात तब की है जब मैंने अी शिक्षा दीक्षा पूरी कर अपने सपनों का पीछा करता हुआ 2004 में दिल्ली पंहुचा ! मित्रों मैं अपने ट्रेड से सम्बंधित हीं जॉब चाहता था कंप्यूटर साइंस से बी.ई. करने के बाद जाहिर सी बात है आई .टी. सेक्टर में हीं प्रयास करना था ! परन्तु आपको मैं सच कहता हूँ मित्रों ,भले हीं मैंने कंप्यूटर साइंस से अभियांत्रिकी की शिक्षा प्राप्त की है परन्तु मैं अपने चार वर्षों में कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पर बहुत अच्छी स्किल विकसित नही कर सका जैसा की मेरे साथ कुछ सहपाठियों ने विकसित किया ! शायद कुछ कहीं कमी मुझसे हीं हो गयी ! परन्तु मित्रों मैं इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं ! क्यूंकि मैं मानता हूँ आज कल के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में मात्र शिक्षा प्राप्त कर लेने से हीं व्यक्ति को सफलता का प्रमाण पत्र नहीं प्रा्त हो जाता , शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी कई इम्तिान से गुजरना पड़ता है ! मैं भी गुजरा ...पहले मैं सरकारी नौकरी को अच्छा नहीं  समझता था और न हीं ज्यादा तवज्जो देता था !अतः मैं किसी अच्छी MNC में जॉब प्रा्त कर सकूँ ..बहुत कोशिश की ! एक दिन में 2 से 3 इंटरव्यू देना मेरे लिए आम बात हो गयी थी ! बस एक हीं धुन सर पर सवार थी की जल्दी से जल्दी मैं एक जॉब ले लूँ ! उस जॉब सर्च के दौरान हर महीने का खर्चा मेरे पिता जी के द्वारा हीं वहन किया जाता था ! अतः मुझे हर महीने लगभग ₹4000 या ₹ 5000 पिता जी बैंक के खाते में जमा  कर दिया करते थे ! जिसमें रूम का किराया और अपने खाने पीने का खर्चा शामिल था ! मेरे अतिरिक्त मेरे साथ दो मित्र और रहते थे ! एक का नाम भूपेंद्र सिंह और एक का नाम वरुण श्रीवास्तव था !भूपेंद्र को हम लोग प्यार से भूप्पी कहा करते थे ! भूपेंद्र ने मैकेनिकल और वरुण ने आईटी से अभियांत्रिकी की शिक्षा पूरी की थी !
उन दौरान हम दिल्ली के लक्ष्मीनगर के गली नंबर 10 में बंसल  जी के माकन में रहा करते थे और अपने - अपने भविष्य को सवारने मैं लगे हुए थे ! मुझे जहाँ तक याद है की जून महीेने का आखरी हफ्ता चल रहा था , महीना खत्म नहीं हुआ था ...पैसे लगभग ख़त्म हो गए थे ! अंतर्मुखी स्वभाव का होने के कारण मैं सुबह निकलते हुए भूप्पी से कह भी नहीं पाया की भाई मेरे पास पैसे आज उतने हीं बचे हैं जितने में मैं डी . टी. सी. बस से आने और जाने का किराया हीं दे पाउँगा ! हर रोज इस उम्मीद से इंटरव्यू के लिए निकलता था की बस आज तो पक्का समझो !पर ऐसा होता कहाँ था ...! उस दिन आप मान लें की मुश्किल मेरी जेब में 40 रूपये होंगे  ! उस वक़्त दिल्ली में मेट्रो नहीं चलती थी ! लक्ष्मीनगर रेड लाइट चौराहे से मैंने डी. टी. सी. बस पकड़ ली और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के जॉब क्लासिफाइड के माध्यम से एक दो इंटरव्यू दे चूका था ! दोंनो इंटरव्यू में कहा गया If you got selected we will call you later...!                                                             लगभग दोपहर के 2 बजे होंगे , मैं करोल बाग के पास डी टी सी बस पकड़ने के लिए बस स्टॉप पर खड़ा था ! गर्मी बहुत भयंकर थी और सूर्य देवता आग उगले जा रहे थे ! मेरे जेब में मात्र 10 रूपये बचे थे और मुझे लक्ष्मीनगर भी पहुँचना था ! मैं ऊ.प्र. के एक छोटी सी जगह शक्तिनगर से हूँ ! मेरा जन्म और परवरिश मध्यम-वर्गीय परिवार में हुआ है ! मैं ये सब अचानक इसलिए बता रहा हूँ ! क्यूंकि तपतपाती गर्मी में अगर आप मेरी छोटी सी जगह के लोगों से पानी मांगे तो बड़े प्यार से लोग पीला देंगे , चाहे वो लोग पारिवारिक हों या व्यवसाई ! अपनी बात पर वापिस आता हूँ ...मुझे बहुत प्यास लग रही थी ...गाला प्यास के मारे सूखा जा रहा था , बस स्टॉप के पास एक पानी बेचने वाला जो साइकिल से जुड़ी हुई तीन पहियों वाली ट्रॉली लिए हुए था !उस वक़्त ये ज्यादातर 1 रूपये प्रति ग्लास पानी पिलाया करते थे और नींबू पानी 5 रूपये का ! अगर मैं  पैसे दे कर पानी पी लेता तब वापिस बस से जाने का किराया पूरा नहीं बचता..मैं पानी बेचने वाले को दूर से काफी देर तक देखता रहा ! तब कहीं हिम्मत जुटा कर उसके पास गया और कहा  ...भाई एक ग्लास पानी पीला दो आज तो 1रूपये नहीं दे पाउँगा पर अगर कल परसों में अगर इधर से गुजरूँगा तो 1 रूपये की बजाये तुम्हे 5 या 10 रूपये दे दूंगा ! पानी वाले ने मना कर दिया ! मैंने उसको कहा भी की भाई अगर मैंने तुम्हे पैसे दे भी दिए तो बस कंडक्टर को पूरे पैसे नहीं दे पाउँगा ! फिर भी उसने मना कर दिया ! मुझे बहुत बुरा महसूस हुआ और मैं बस स्टॉप पर लगी कुर्सी पर बैठ कर सोचने लगा ..! एक रूपये को कमाने के लिए लोग कभी - कभी मानवता भी भूल जाते हैं !अगर पानी वाले ने मुझे ना नहीं कहा होता तो शायद मुझे 1रूपये की कीमत का पता जिंदगी भर नहीं चलता ..ध्यानवाद उसका !                                         उस दिन मुझे पता चला की मैंने जब भी कभी पढाई या तैयारी के दौरान मैंने माता - पिता से कहा की मुझे 5 हजार या 10 हजार की जरुरत है तो अगले हीं दिन मेरे खाते में वो जमा कर देते थे ! पर पिता जी कितनी मेहनत से वो पैसे कमाते होंगे ...उस वक़्त आभास हो गया ! एक रूपये की कीमत क्या होती है उस गर्मी की प्यास ने मुझे समझा दिया ! मित्रों मैं आपसे इतना हीं कहना चाहूंगा की माता पिता कभी भी अपने बच्चों को गलत सलाह नहीं देते ! यदि आप अध्ययनरत हैं तो कृपया अपने माता पिता की सलाह को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए आगे बढ़े ! मित्रों मैं आज अपने पैरों पर खड़ा हो पाया हूँ... तो निःसंदेह कहीं न कहीं मेरी मेहनत के बदौलत परन्तु मेरे माता - पिता का आशीर्वाद मेरे साथ नहीं होता तो शायद यहाँ तक का सफर भी मुझसे नहीं तय होता ! अतः आपसे अनुरोध है माता- पिता का कभी दिल न दुखाये और जिनकी वजह से आपका वजूद दुनिया में है ..कम से कम उनको सम्मान दें ! आपने  इतने
धीरज के साथ मुझे पढ़ा उसके लिए कोटि- कोटि धन्यवाद !
कृपया अपने विचार कमेंट में देना न भूले की आपको ये छोटी सी घटना कैसी लगी!                                                             आपका :प्रकाश         

Monday, November 27, 2017

Kushasan (कुशासन...)

कुशासन

इसे शासन कहूँ या कुशासन,
व्यापार कहूं या भ्रष्टाचार !
जिसने हाँथ जोड़कर वोट लिया ,
वो हीं करता हम पर अत्याचार !

इक छोटी सी नौकरी के लिए ,
दिन रात हमे है पढ़ना पड़ता!
वो बिन कलम छुए सत्ता को पकड़े,
शब्दों से बस है लड़ना पड़ता !

जिस जोश से साथ दिया था तुमने ,
बापू और अन्ना के मुहीम को !
अब भी हटा नहीं है भ्रष्टाचार यहाँ,
आओ मिल कर बदलें देश की तक़दीर को !

घूसखोरी कालाधन और काला-बाजारियाँ ,
कब तक देश में हों बीमारी और महामारियां !
सूरत कब बदलेगी देश की तस्वीर की ,
जब बदलोगे नियत जालसाजी और फ़रेब की!

prakashp6692@gmail.com

Sunday, November 12, 2017

कुछ मेरे बारे में !


   नमस्कार मित्रों ,
ब्लॉग "हिंदी साँची " पर आपका स्वागत है ! मुझे अच्छे से याद है जब पहली बार एक व्यंग कविता " चाँद पर पांव " क्षेत्रीय पत्रिका शक्ति - सन्देश में प्रकाशित हुई थी तब मैं महज़ आठवीं कक्षा में पढ़ता था ! जब मेरी कविता प्रकाशित हुई तो मुझे बहुत हर्ष का अनुभव हुआ, परन्तु शिक्षा भी जरुरी थी अब स्वतः कुछ लिखने को मन चाहता है ! परन्तु मेरा मानना है हम जीवन भर मिट्टी के कच्चे घड़े के समान और समाज हमेशा कुम्हार की तरह होता है ,जो हमे ठोक-पीट कर एक सुन्दर आकार देने का प्रयास करता है! अतः आप सभी से अनुरोध है कि कृपया मेरी खामियां बताते रहे ताकि उन्हें मैं सुधार सकूँ! आप Google पर prakashp6692.blogspot.in  टाइप करें और मेरी कुछ रचनाओं  से रु -बरु  हो जाएं! धन्यवाद !
आपका  -प्रकाश.

   
   

Monday, November 6, 2017

ऐ वतन !




तुझे याद करके ऐ वतन ,
चुप चाप मैं यूँ रोता रहा !

वो सरहदों पर जागते रहे ,
मैं चैन से बेख़ौफ़ सोता रहा !

सियासतों की आपसी जंग में ,
कुछ बेगुनाह से पिसते रहे !

जब भी वो आपस में लड़े ,
कुछ मासूम सिसकते से रहे !

जब भी लहू बिखरा सरहदों पर ,
कुछ घरों के लोग बिलखते से रहे !

मैं भी देखूँ तुम भी देखो जरा ,
बिखरे लहू हमारे सरहदों पर !

जो मुझ पर है गुजरी किससे कहूँ ,
इस पार या उस पार का जो बिखरा है लहू !

ऐ खुदा मुझ पर बस इतना करम कर दो ,
क़ायनात रचो इंसानियत मजहब कर दो !
                         
                          आपका :  प्रकाश.

Monday, October 30, 2017

(By my pen) वाह री तन्हाई...!






वाह री तन्हाई ...
दुनिया ने तो मुझे ठुकराया हीं
तूने भी रूठ कर घूघंट तानी ...
घूंघट हटा और मुझमें देख
आंसूओं का कुहरा...
पसंद आये तो सहला थोड़ा
अपनी आहोश में ले ले
और बहका थोड़ा...
दुनिया ने तो मुझसे ..
कब का है मुँह मोड़ा
कब का है मुँह मोड़ा ...
                 
 

   आपका : प्रकाश



(मित्रों एक पाठक के अमूल्य सुझाव पर
"Wah ri tanhai" का परिवर्तित रूप
आपसे साझा कर रहा हूँ उम्मीद है आपको
पसंद आएगी )


Saturday, October 28, 2017

फिर मोहब्बत हो जाए तो...


 लिबाज़ो मन दोनों से हूँ मैं निहायत सादा सा
 तेरी जुबां कुछ और आँखें कुछ और बताये तो ..

कोशिशें यही करता रहा सम दिखूं सम बन जाऊं
बाद भी उसके अल्फ़ाज़ चुभें और सताएं तो...

शिद्दत से चाहा, सराहा, नवाज़ा है मैंने तुझको
खौफ़ में दिल है रक़ीब कोई और बन जाए तो...

प्रित के पांव रखे हर जगह संभाल कर हमने
नाराज़ क्यों रहबर मेरा ख़ता कोई बतलाए तो...

यूँ तो सबके सफर, मक़सद, मिज़ाज़ अलग हैं
मैं भी तू भी मतलबी गर मंज़र एक हो जाए तो...

गैरों के इशारे पर कितना खुद को बचा पायेगा
ऐसा ना हो मुफ़लिसी में फिर मोहब्बत हो जाए तो...

                         "मौलिक व अप्रकाशित" 

Thursday, October 26, 2017

गुज़ारिशें फ़रियाद...


  गुज़ारिशें फ़रियाद...

कुछ मजबूरिया थीं
ना मुँह मोड़ने वाली 
परेशानीयों के साथ...

इरादा तो था कि
चले कुछ और कदम 
तेरे साथ यूँ हीं
तेरी राहे मंज़िल मिल जाने तक...

ऐसा कभी तो हुआ होगा 
मेरे सपनों ने तुझे 
ज़रूर छुआ होगा...

सफर तन्हा हो 
या हो एक साथ 
खुश रहे तू सदा  
हर दिन हर एक रात...

यही है अब रब से
गुज़ारिशें फ़रियाद...

      आपका : प्रकाश ! 

Wednesday, October 25, 2017

आख़िरी सफ़र..!


                आख़िरी सफ़र ...

 जीवन की आख़िरी सच्चाई से  पाला पड़ा,
दुखी होकर भी सच्चे मन से वहां जाना पड़ा!

सबकी आँखे नम थीं लब थे ख़ामोश,
मौत सा सन्नाटा था चीखें तबाही की सुनी!

सफ़ेद लिबाज़ में लिपटे थे सभी,
ऐसा मातम नहीं देखा  था कभी!

हिम्मत कर आँसूं न झलकने दिया  मैंने,
खामोश नज़रों से सबको देखा किया!

रो रो कर जब थक जाते चुप हो जाते,
फिर भभक - भभक कर रो उठते थे वो!

कैसी लीला है तेरी हे मेरे भगवान,
चुप करते हुए रो पड़ा मैं भी एक इंसान!

आख़िरी सफ़र था चार कन्धों की ज़रूरत,
एक कन्धा मैं खुद बना वाह रे कुदरत!

राम नाम सत्य है का जाप चलता रहा,
वो चार कन्धों के ऊपर काफ़िला पीछे चलता रहा!

सफ़र ख़तम होते हीं गंगा का किनारा मिला,
डुबकी लगा कर किनारे का सहारा मिला!

चन्दन की लकड़ी एक एक कर कोई सजता रहा,
सिर्फ अकेला वो लेट सके मचान वो बनता रहा!

जब वो लकड़ियों के मचान पर लेट गया,
रोक न सका खुद को गम के आँसूं रोता रहा!

फिर एक आग की लपट ने लपेट लिया उसको,
वो दर्द जो मैंने सबने सहा कहूँ मैं किसको!

एक दिन यही हष्र सबके साथ होना है,
तक़दीर के दामन में छुपा मौत का कोना है!


मित्रों सादर नमस्कार, अपने स्वयं के एक रिश्तेदार के देहांत होने पर पहली बार अंतिम संस्कार में मौजूद होने पर घर लौट के आने के उपरान्त जो भाव मन में उमड़े वो आप सभी से साझा कर रहा हूँ ...क्यूंकि मेरा मानना है कि मृत्यु जीवन का आख़िरी कड़वा सच है, एक दिन हम सभी को न चाहते हुए भी उसका सामना करना हीं होगा! मेरे भाव को समझने और पढ़ने के लिए आपका कोटि - कोटि आभार एवं धनयवाद !