Sunday, December 31, 2017

अलविदा 2017 ! Welcome 2018


*अलविदा 2017*



     मित्रों आने वाले साल को आप कैसे जीते हैं ये 100% आप पर निर्भर करता है ! मैं मानता हूँ कि आने वाले एक साल का एक -एक दिन life के एक -एक पन्ने की तरह है और 1st January 2018 को एक ऐसी बुक open होने वाली है जिसमें 365 pages हैं ! पर ख़ास बात यह है कि इस बुक के writer आप सभी हो और इस book के सभी पन्ने कोरे हैं !
    मित्रों life के हर दिन हर पन्ने को ख़ुशी , जोश, उत्साह, उमंग और सफलता से भर दो ! एक बात मैं आप सबसे साझा करना चाहूंगा कि goal और desire में फर्क होता है ! 85% लोगों के पास goal होता हीं नहीं , उनके पास सिर्फ desire होता है ! जैसे की मेरे पास बड़ा सा घर ! एक सुन्दर सी Car हो ये मात्र सोचना desire है न की goal. कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि सफल लोग goal oriented होते हैं ! आप भी अपना goal set करें और उसे प्राप्त करने के लिए मेहनत करें !


   वर्ष 2017 में आप सभी साथियो ने दिल से प्यार व योगदान दिया। जिसके लिए मैं दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। इस बीते हुए साल में संघर्ष के दौरान मेरे द्वारा भी मेरे कर्म व वाणी से यदि आपके दिल को कष्ट पहुँचा हो तो उसके लिए क्षमा चाहता हूँ।
उम्मीद करता हूँ कि आने वाला नव वर्ष 2018  आप सभी के लिए ढेर सारी खुशिया लेकर आये ।
धन्यवाद !
आपका
*प्रकाश  *
♥♥ कल आपको बधाई देने वालों की कतार लगी होगी /
हो सकता है उस भीड़ में हमारी शुभकामनाये आप न पढ़ पाये इसलिए आज हमारी तरफ़ से आपको व आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ 🌷🌷

💐💐happy new year 2018 💐💐

             आपका: प्रकाश

Sunday, December 24, 2017

Merry Christmas




मित्रों Christmas... की आपको बहुत -बहुत बधाई एवं शुभकामनायें  !
प्रभु यीशु के जन्मदिन के मौके पर आज भारत समेत पूरी दुनिया में क्रिसमस पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। 24 दिसम्बर रात से ही ‘हैप्पी क्रिसमस-मेरी क्रिसमस’ से बधाइयों का सिलसिला जारी हो जाता है। देश के सभी शहरों में लोगों के घर ‘क्रिसमस ट्री’ सजाया जाता है, तो सांता दूसरों को उपहार देकर जीवन में देने का सुख हासिल करने का संदेश देता है। मगर क्या आप जानते हैं क्रिसमस 25 को ही क्यों मनाया जाता है। 




25 December को  क्यों मनाया जाता है क्रिसमस
क्रिसमस का आरंभ करीबन चौथी सदी में हुआ था। इससे पहले प्रभु यीशु के अनुयायी उनके जन्म दिवस को त्योहार के रूप में नहीं मनाते थे। 


यीशु के पैदा होने और मरने के सैकड़ों साल बाद जाकर कहीं लोगों ने 25 दिसम्बर को उनका जन्मदिन मनाना शुरू किया। मगर इस तारीख को यीशु का जन्म नहीं हुआ था क्यूंकि सबूत दिखाते हैं कि वह अक्टूबर में पैदा हुए थे। दिसम्बर में नहीं। 
ईसाई होने का दावा करने वाले कुछ लोगों ने बाद में जाकर इस दिन को चुना था क्योंकि इस दिन रोम के गैर ईसाई लोग अजेय सूर्य का जन्मदिन मनाते थे और ईसाई चाहते थे की यीशु का जन्मदिन भी इसी दिन मनाया जाए। 

आपका:  प्रकाश !

Wednesday, December 20, 2017

मुश्किल काम थोड़ा समय लेते हैं ...



मित्रों किसी ने सच हीं कहा है :



मुश्किल काम थोड़ा समय लेते हैं ...!
और असंभव काम थोड़ा और ज्यादा समय लेते हैं ...!



अतः जब किसी कार्य को जब आप सिद्ध करने में लगे हों और
वह काम आपको यदि कठिन लगे और उसे पूरा करने में आपको वक़्त ज्यादा लगे तो कृपया इन पंक्तिओं का समरण जरूर करें इसे आपको साहस जरूर मिलेगा ...!

 

Prakashp6692.blogspot.in
Hindisanchi.blogspot.in

Wednesday, December 6, 2017

Kimat 1 rupye ki (कीमत 1 रूपये की..)

 कीमत 1 रूपये की...

कई लोगों के जीवन में कई अलग - अलग अनुभव होते हैं. मेरे भी जीवन में कुछ ऐसे अनुभव हुए हैं जिनको भूल जाना हीं बेहतर है परन्तु ..कभी- कभी ये बातें अक्सर तन्हाई में याद आ हीं जाती है ! तो क्या अकेले सोच कर याद कर बर्दास्त कर लूं या फिर आप सभी से साझा कर लूं !
क्यूंकि मैं एक प्रसिद्ध हस्ती नहीं एक आम इंसान हूँ ..यदि मैंने आप सभी को अपना दोस्त समझ कर अपनी कुछ बातें साझा कर भी लीं तो क्या मेरी छवि धूमिल हो जाएगी ...मैं समझता हूँ ...नहीं ! तो मित्रों आइये एक छोटी सी घटना मैं आपसे साझा कर हीं लेता हूँ !
बात तब की है जब मैंने अी शिक्षा दीक्षा पूरी कर अपने सपनों का पीछा करता हुआ 2004 में दिल्ली पंहुचा ! मित्रों मैं अपने ट्रेड से सम्बंधित हीं जॉब चाहता था कंप्यूटर साइंस से बी.ई. करने के बाद जाहिर सी बात है आई .टी. सेक्टर में हीं प्रयास करना था ! परन्तु आपको मैं सच कहता हूँ मित्रों ,भले हीं मैंने कंप्यूटर साइंस से अभियांत्रिकी की शिक्षा प्राप्त की है परन्तु मैं अपने चार वर्षों में कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पर बहुत अच्छी स्किल विकसित नही कर सका जैसा की मेरे साथ कुछ सहपाठियों ने विकसित किया ! शायद कुछ कहीं कमी मुझसे हीं हो गयी ! परन्तु मित्रों मैं इतनी जल्दी हार मानने वालों में से नहीं ! क्यूंकि मैं मानता हूँ आज कल के इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में मात्र शिक्षा प्राप्त कर लेने से हीं व्यक्ति को सफलता का प्रमाण पत्र नहीं प्रा्त हो जाता , शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी कई इम्तिान से गुजरना पड़ता है ! मैं भी गुजरा ...पहले मैं सरकारी नौकरी को अच्छा नहीं  समझता था और न हीं ज्यादा तवज्जो देता था !अतः मैं किसी अच्छी MNC में जॉब प्रा्त कर सकूँ ..बहुत कोशिश की ! एक दिन में 2 से 3 इंटरव्यू देना मेरे लिए आम बात हो गयी थी ! बस एक हीं धुन सर पर सवार थी की जल्दी से जल्दी मैं एक जॉब ले लूँ ! उस जॉब सर्च के दौरान हर महीने का खर्चा मेरे पिता जी के द्वारा हीं वहन किया जाता था ! अतः मुझे हर महीने लगभग ₹4000 या ₹ 5000 पिता जी बैंक के खाते में जमा  कर दिया करते थे ! जिसमें रूम का किराया और अपने खाने पीने का खर्चा शामिल था ! मेरे अतिरिक्त मेरे साथ दो मित्र और रहते थे ! एक का नाम भूपेंद्र सिंह और एक का नाम वरुण श्रीवास्तव था !भूपेंद्र को हम लोग प्यार से भूप्पी कहा करते थे ! भूपेंद्र ने मैकेनिकल और वरुण ने आईटी से अभियांत्रिकी की शिक्षा पूरी की थी !
उन दौरान हम दिल्ली के लक्ष्मीनगर के गली नंबर 10 में बंसल  जी के माकन में रहा करते थे और अपने - अपने भविष्य को सवारने मैं लगे हुए थे ! मुझे जहाँ तक याद है की जून महीेने का आखरी हफ्ता चल रहा था , महीना खत्म नहीं हुआ था ...पैसे लगभग ख़त्म हो गए थे ! अंतर्मुखी स्वभाव का होने के कारण मैं सुबह निकलते हुए भूप्पी से कह भी नहीं पाया की भाई मेरे पास पैसे आज उतने हीं बचे हैं जितने में मैं डी . टी. सी. बस से आने और जाने का किराया हीं दे पाउँगा ! हर रोज इस उम्मीद से इंटरव्यू के लिए निकलता था की बस आज तो पक्का समझो !पर ऐसा होता कहाँ था ...! उस दिन आप मान लें की मुश्किल मेरी जेब में 40 रूपये होंगे  ! उस वक़्त दिल्ली में मेट्रो नहीं चलती थी ! लक्ष्मीनगर रेड लाइट चौराहे से मैंने डी. टी. सी. बस पकड़ ली और टाइम्स ऑफ़ इंडिया के जॉब क्लासिफाइड के माध्यम से एक दो इंटरव्यू दे चूका था ! दोंनो इंटरव्यू में कहा गया If you got selected we will call you later...!                                                             लगभग दोपहर के 2 बजे होंगे , मैं करोल बाग के पास डी टी सी बस पकड़ने के लिए बस स्टॉप पर खड़ा था ! गर्मी बहुत भयंकर थी और सूर्य देवता आग उगले जा रहे थे ! मेरे जेब में मात्र 10 रूपये बचे थे और मुझे लक्ष्मीनगर भी पहुँचना था ! मैं ऊ.प्र. के एक छोटी सी जगह शक्तिनगर से हूँ ! मेरा जन्म और परवरिश मध्यम-वर्गीय परिवार में हुआ है ! मैं ये सब अचानक इसलिए बता रहा हूँ ! क्यूंकि तपतपाती गर्मी में अगर आप मेरी छोटी सी जगह के लोगों से पानी मांगे तो बड़े प्यार से लोग पीला देंगे , चाहे वो लोग पारिवारिक हों या व्यवसाई ! अपनी बात पर वापिस आता हूँ ...मुझे बहुत प्यास लग रही थी ...गाला प्यास के मारे सूखा जा रहा था , बस स्टॉप के पास एक पानी बेचने वाला जो साइकिल से जुड़ी हुई तीन पहियों वाली ट्रॉली लिए हुए था !उस वक़्त ये ज्यादातर 1 रूपये प्रति ग्लास पानी पिलाया करते थे और नींबू पानी 5 रूपये का ! अगर मैं  पैसे दे कर पानी पी लेता तब वापिस बस से जाने का किराया पूरा नहीं बचता..मैं पानी बेचने वाले को दूर से काफी देर तक देखता रहा ! तब कहीं हिम्मत जुटा कर उसके पास गया और कहा  ...भाई एक ग्लास पानी पीला दो आज तो 1रूपये नहीं दे पाउँगा पर अगर कल परसों में अगर इधर से गुजरूँगा तो 1 रूपये की बजाये तुम्हे 5 या 10 रूपये दे दूंगा ! पानी वाले ने मना कर दिया ! मैंने उसको कहा भी की भाई अगर मैंने तुम्हे पैसे दे भी दिए तो बस कंडक्टर को पूरे पैसे नहीं दे पाउँगा ! फिर भी उसने मना कर दिया ! मुझे बहुत बुरा महसूस हुआ और मैं बस स्टॉप पर लगी कुर्सी पर बैठ कर सोचने लगा ..! एक रूपये को कमाने के लिए लोग कभी - कभी मानवता भी भूल जाते हैं !अगर पानी वाले ने मुझे ना नहीं कहा होता तो शायद मुझे 1रूपये की कीमत का पता जिंदगी भर नहीं चलता ..ध्यानवाद उसका !                                         उस दिन मुझे पता चला की मैंने जब भी कभी पढाई या तैयारी के दौरान मैंने माता - पिता से कहा की मुझे 5 हजार या 10 हजार की जरुरत है तो अगले हीं दिन मेरे खाते में वो जमा कर देते थे ! पर पिता जी कितनी मेहनत से वो पैसे कमाते होंगे ...उस वक़्त आभास हो गया ! एक रूपये की कीमत क्या होती है उस गर्मी की प्यास ने मुझे समझा दिया ! मित्रों मैं आपसे इतना हीं कहना चाहूंगा की माता पिता कभी भी अपने बच्चों को गलत सलाह नहीं देते ! यदि आप अध्ययनरत हैं तो कृपया अपने माता पिता की सलाह को सकारात्मक रूप से स्वीकार करते हुए आगे बढ़े ! मित्रों मैं आज अपने पैरों पर खड़ा हो पाया हूँ... तो निःसंदेह कहीं न कहीं मेरी मेहनत के बदौलत परन्तु मेरे माता - पिता का आशीर्वाद मेरे साथ नहीं होता तो शायद यहाँ तक का सफर भी मुझसे नहीं तय होता ! अतः आपसे अनुरोध है माता- पिता का कभी दिल न दुखाये और जिनकी वजह से आपका वजूद दुनिया में है ..कम से कम उनको सम्मान दें ! आपने  इतने
धीरज के साथ मुझे पढ़ा उसके लिए कोटि- कोटि धन्यवाद !
कृपया अपने विचार कमेंट में देना न भूले की आपको ये छोटी सी घटना कैसी लगी!                                                             आपका :प्रकाश         

Monday, November 27, 2017

Kushasan (कुशासन...)

कुशासन

इसे शासन कहूँ या कुशासन,
व्यापार कहूं या भ्रष्टाचार !
जिसने हाँथ जोड़कर वोट लिया ,
वो हीं करता हम पर अत्याचार !

इक छोटी सी नौकरी के लिए ,
दिन रात हमे है पढ़ना पड़ता!
वो बिन कलम छुए सत्ता को पकड़े,
शब्दों से बस है लड़ना पड़ता !

जिस जोश से साथ दिया था तुमने ,
बापू और अन्ना के मुहीम को !
अब भी हटा नहीं है भ्रष्टाचार यहाँ,
आओ मिल कर बदलें देश की तक़दीर को !

घूसखोरी कालाधन और काला-बाजारियाँ ,
कब तक देश में हों बीमारी और महामारियां !
सूरत कब बदलेगी देश की तस्वीर की ,
जब बदलोगे नियत जालसाजी और फ़रेब की!

prakashp6692@gmail.com

Sunday, November 12, 2017

कुछ मेरे बारे में !


   नमस्कार मित्रों ,
ब्लॉग "हिंदी साँची " पर आपका स्वागत है ! मुझे अच्छे से याद है जब पहली बार एक व्यंग कविता " चाँद पर पांव " क्षेत्रीय पत्रिका शक्ति - सन्देश में प्रकाशित हुई थी तब मैं महज़ आठवीं कक्षा में पढ़ता था ! जब मेरी कविता प्रकाशित हुई तो मुझे बहुत हर्ष का अनुभव हुआ, परन्तु शिक्षा भी जरुरी थी अब स्वतः कुछ लिखने को मन चाहता है ! परन्तु मेरा मानना है हम जीवन भर मिट्टी के कच्चे घड़े के समान और समाज हमेशा कुम्हार की तरह होता है ,जो हमे ठोक-पीट कर एक सुन्दर आकार देने का प्रयास करता है! अतः आप सभी से अनुरोध है कि कृपया मेरी खामियां बताते रहे ताकि उन्हें मैं सुधार सकूँ! आप Google पर prakashp6692.blogspot.in  टाइप करें और मेरी कुछ रचनाओं  से रु -बरु  हो जाएं! धन्यवाद !
आपका  -प्रकाश.

   
   

Monday, November 6, 2017

ऐ वतन !




तुझे याद करके ऐ वतन ,
चुप चाप मैं यूँ रोता रहा !

वो सरहदों पर जागते रहे ,
मैं चैन से बेख़ौफ़ सोता रहा !

सियासतों की आपसी जंग में ,
कुछ बेगुनाह से पिसते रहे !

जब भी वो आपस में लड़े ,
कुछ मासूम सिसकते से रहे !

जब भी लहू बिखरा सरहदों पर ,
कुछ घरों के लोग बिलखते से रहे !

मैं भी देखूँ तुम भी देखो जरा ,
बिखरे लहू हमारे सरहदों पर !

जो मुझ पर है गुजरी किससे कहूँ ,
इस पार या उस पार का जो बिखरा है लहू !

ऐ खुदा मुझ पर बस इतना करम कर दो ,
क़ायनात रचो इंसानियत मजहब कर दो !
                         
                          आपका :  प्रकाश.

Monday, October 30, 2017

(By my pen) वाह री तन्हाई...!






वाह री तन्हाई ...
दुनिया ने तो मुझे ठुकराया हीं
तूने भी रूठ कर घूघंट तानी ...
घूंघट हटा और मुझमें देख
आंसूओं का कुहरा...
पसंद आये तो सहला थोड़ा
अपनी आहोश में ले ले
और बहका थोड़ा...
दुनिया ने तो मुझसे ..
कब का है मुँह मोड़ा
कब का है मुँह मोड़ा ...
                 
 

   आपका : प्रकाश



(मित्रों एक पाठक के अमूल्य सुझाव पर
"Wah ri tanhai" का परिवर्तित रूप
आपसे साझा कर रहा हूँ उम्मीद है आपको
पसंद आएगी )


Saturday, October 28, 2017

फिर मोहब्बत हो जाए तो...


 लिबाज़ो मन दोनों से हूँ मैं निहायत सादा सा
 तेरी जुबां कुछ और आँखें कुछ और बताये तो ..

कोशिशें यही करता रहा सम दिखूं सम बन जाऊं
बाद भी उसके अल्फ़ाज़ चुभें और सताएं तो...

शिद्दत से चाहा, सराहा, नवाज़ा है मैंने तुझको
खौफ़ में दिल है रक़ीब कोई और बन जाए तो...

प्रित के पांव रखे हर जगह संभाल कर हमने
नाराज़ क्यों रहबर मेरा ख़ता कोई बतलाए तो...

यूँ तो सबके सफर, मक़सद, मिज़ाज़ अलग हैं
मैं भी तू भी मतलबी गर मंज़र एक हो जाए तो...

गैरों के इशारे पर कितना खुद को बचा पायेगा
ऐसा ना हो मुफ़लिसी में फिर मोहब्बत हो जाए तो...

                         "मौलिक व अप्रकाशित" 

Thursday, October 26, 2017

गुज़ारिशें फ़रियाद...


  गुज़ारिशें फ़रियाद...

कुछ मजबूरिया थीं
ना मुँह मोड़ने वाली 
परेशानीयों के साथ...

इरादा तो था कि
चले कुछ और कदम 
तेरे साथ यूँ हीं
तेरी राहे मंज़िल मिल जाने तक...

ऐसा कभी तो हुआ होगा 
मेरे सपनों ने तुझे 
ज़रूर छुआ होगा...

सफर तन्हा हो 
या हो एक साथ 
खुश रहे तू सदा  
हर दिन हर एक रात...

यही है अब रब से
गुज़ारिशें फ़रियाद...

      आपका : प्रकाश ! 

Wednesday, October 25, 2017

आख़िरी सफ़र..!


                आख़िरी सफ़र ...

 जीवन की आख़िरी सच्चाई से  पाला पड़ा,
दुखी होकर भी सच्चे मन से वहां जाना पड़ा!

सबकी आँखे नम थीं लब थे ख़ामोश,
मौत सा सन्नाटा था चीखें तबाही की सुनी!

सफ़ेद लिबाज़ में लिपटे थे सभी,
ऐसा मातम नहीं देखा  था कभी!

हिम्मत कर आँसूं न झलकने दिया  मैंने,
खामोश नज़रों से सबको देखा किया!

रो रो कर जब थक जाते चुप हो जाते,
फिर भभक - भभक कर रो उठते थे वो!

कैसी लीला है तेरी हे मेरे भगवान,
चुप करते हुए रो पड़ा मैं भी एक इंसान!

आख़िरी सफ़र था चार कन्धों की ज़रूरत,
एक कन्धा मैं खुद बना वाह रे कुदरत!

राम नाम सत्य है का जाप चलता रहा,
वो चार कन्धों के ऊपर काफ़िला पीछे चलता रहा!

सफ़र ख़तम होते हीं गंगा का किनारा मिला,
डुबकी लगा कर किनारे का सहारा मिला!

चन्दन की लकड़ी एक एक कर कोई सजता रहा,
सिर्फ अकेला वो लेट सके मचान वो बनता रहा!

जब वो लकड़ियों के मचान पर लेट गया,
रोक न सका खुद को गम के आँसूं रोता रहा!

फिर एक आग की लपट ने लपेट लिया उसको,
वो दर्द जो मैंने सबने सहा कहूँ मैं किसको!

एक दिन यही हष्र सबके साथ होना है,
तक़दीर के दामन में छुपा मौत का कोना है!


मित्रों सादर नमस्कार, अपने स्वयं के एक रिश्तेदार के देहांत होने पर पहली बार अंतिम संस्कार में मौजूद होने पर घर लौट के आने के उपरान्त जो भाव मन में उमड़े वो आप सभी से साझा कर रहा हूँ ...क्यूंकि मेरा मानना है कि मृत्यु जीवन का आख़िरी कड़वा सच है, एक दिन हम सभी को न चाहते हुए भी उसका सामना करना हीं होगा! मेरे भाव को समझने और पढ़ने के लिए आपका कोटि - कोटि आभार एवं धनयवाद !     
     

Tuesday, October 24, 2017

ख्वाबे हक़ीक़त !

         ख्वाबे हक़ीक़त

जैसा ख्वाबों में सोचा था कभी ,
हकीकत बनकर सामने है वो अभी !

मेरे ख्वाबों से ख्वाब जोड़ लिए उसने ,
इरादों की नींव पर ईंटें रख दी कई !

 कहता है की हिम्मत मत हार अब,
सफ़र बहुत हुआ मक़सद हासिल है अब !

उसे देखता हूँ तो जुनून भर आता है,
नूर में उसके ख़ुदा झलक जाता है !



मित्रों ये पंक्तियाँ किसी ख़ास व्यक्ति को समर्पित है !
                                     
                                      आपका :  प्रकाश
    

Monday, October 23, 2017

सहूँ मैं कितना ?



ख़ुशियाँ हो तो बाँट भी लूँ
इस गम को कैसे बाटूँ मैं ...

दिन जैसे तैसे काट भी लूँ 
बेबसी के लम्हे कैसे काटूँ मैं...

चेहरे पर ख़ुशी दिखाने को है 
झाँको अंदर गम है कितना...

तुम्हारे जुल्म कभी तो कम हो 
दर्द सहूं चुप हो कर कितना ...

मंज़र सोच के ख़ामोश हैं लब
ज़वाब तो हम भी दे सकते हैं...

कस्ती की पतवार क्या छुटी 
मझधार भी हावी होने लगे हैं...

 एक पल मेरा भी होगा अपना 
जब पूरा होगा मन का सपना...

चलने पर मंजर मिल ही जायेगा 
देखते हैं और वक़्त लगेगा कितना...
         
                     आपका :  प्रकाश







Sunday, October 22, 2017

सहरे हलचल ...!

  




होती है सहरे हलचल सी दिल में 
काश मिल जाये तू किसी महफ़िल में...

दर बदर तुझे ढूँढू मैं इस कदर  
अब ना मुझे होश है न खुद की ख़बर..


ऐ माशूक़ तुझे क्या इल्म तुझे क्या खबर  
बेतहाशा तुझे चाहा था मैंने किस कदर...

मय का सहारा लूँ की तेरी आँखों में कर लूँ बसर  
ना जिंदगी में तू होती न टूटता ये कहर  ...

तेरे अक़्स को हकीकत करूँ मौका मिले अगर  
यूँ तो रोज आती है शाम रोज होती है सहर  ..


तेरी यादों के खिदमत में पेश हैं मेरे  .
दिन और रातों के हर लम्हे और चारों पहर  ...

जिंदगी मुक्क़मल कर दो कुछ इस कदर 
खुदा के बाद इबादत हो तेरी ऐ हमसफ़र ...
                       आपका :  प्रकाश


Tuesday, October 17, 2017

हौसलेमंद हूँ मैं !





        
हौसलेमंद  हूँ  मैं 

मायूश नहीं हौसलेमंद हूँ मैं,
गिरा कई बार फिर खड़ा हूँ मैं!

पहाड़ों से सिख मिली इरादों को,
नदियों से सीखा हुनर मिल जाने का!

गहराई मुझमें सागरों जितनी,
गंगा सा निर्मल मन हो जाये!

जिस तरह तेज हवाओं को साखों ने सहा,
मैंने भी कई गम सहे कुछ ना कहा!

परेशानियों से समझौता मैं ना करूँगा,
तूफ़ान हो या आंधी सब सहूँगा!

पहले सिर्फ उलझे विचार किये,
अब सिर्फ सच और सच हीं कहूँगा!

हवाएं चलती हैं तेज चलती रहे गम नहीं,
तम्मना मंजिल की है मंजिल से कुछ कम नहीं!

                                      आपका  - प्रकाश

धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।।

प्रिय मित्रों  
आप सभी को धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं।। कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन धनतेरस मनाया जाता है। दिवाली भारत का प्रमुख त्योहार है ये त्योहार पंचदिवसीय होता है। इसकी शुरुआत धनतेरस के दिन से होती है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व होता है। धनतेरस के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। इस दिन धन और आरोग्य के लिए मां लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वंतरि और कुबेर की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार दिवाली से दो दिन पूर्व धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि का जन्म हुआ था।

इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान वो अपने साथ अमृत कलश और आयुर्वेद लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण से भगवान धन्वंतरि को औषधी का जनक भी कहा जाता है। इस दिन सोना-चांदी आदि की खरीददारी करना शुभ माना जाता है। इसदिन घर पर विशेष पूजा करनी चाहिए क्योंकि इस दिन मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर आ जाती हैं तो हमेशा के लिए वहीं रुक जाती हैं। ये दिन सिर्फ धन की प्राप्ति के लिए ही नहीं मनाया जाता इस दिन को स्वास्थय जागरुकता का दिन भी कहा जाता है और अच्छे स्वास्थय की प्रार्थना की जाती है।  
आपका -  प्रकाश

Sunday, October 15, 2017

सफ़र

साख से टूटे एक लावारिश पत्ते की तरह ,
 रुला दिया किसी ने मुझे बच्चे की तरह !

ख्वाहिश थी आसमान में उडूं ,
 बेख़ौफ़ पंछियों की तरह !

ज़माने ने सोने सा घर दे दिया ,
 एक पिंजरे की तरह !

खामियां मैं सुधार लूँ ,
रुख बदलती हवाओं की तरह !

बेचैनियों को राहत दो ,
 जख्में मरहम की तरह!

सफर बहुत हो चूका
टूटते हुए तारे की तरह !








शुभ- विचार

शुभ- विचार

1) जिसके पास धैर्य है, वह जो कुछ इच्छा करता है, प्राप्त कर सकता है। – फ्रैंकलिन
2) दो धर्मों का कभी भी झगड़ा नहीं होता। सब धर्मों का अधर्मो से ही झगड़ा है। –  विनोबा भावे
3) मानव के कर्म ही उसके विचारों की सर्वश्रेष्ट व्याख्या हैं। – लॉक
4) दुःख भोगने से सुख के मूल्य का ज्ञान होता है। – शेख सादी

Saturday, October 14, 2017

By my pen ( WAH RI TANHAI )

WAH RI TANHAI




Wah ri tanhai duniya ne to 
mujhse muh Moda hi ...
Tune bhi Ruth kar ghunghant tani ...
Ghunghant hata aur mujhmein dekh ...
Ansoonon ka kuhara ...
Apni agosh mein le le...
Mujhe bahka thoda...
Duniya ne to mujhse ..
Kab ka hai muh Moda...
Kab ka hai muh moda.....